
तुम मुझे दो कुछ नाम और
देखो मै वही बन जाऊंगी
ख्वाब कहोगे तो तुम्हारी पलकों की
थिरकन पर बिखरूंगी सवरूंगी
थोडा इतराते हुए और मुस्कुराते हुए
चुपचाप तुम्हारी ज़िन्दगी का हिस्सा बन ही जाऊंगी
और जो कह दोंगे मुझे
मै कोई हकीक़त कडवी सी,
तो भी क्या
बस यू ही एक अनजान की तरह
छोड़ जाऊंगी तुमको,
वही से जहा से तुम इशारा कर दोगे जाने का
ग़ज़ल गीत जो कह दोगे
तो शब्दों को अपने आगोश में यू ले लुंगी
जो मेरी शक्शियत का आईना बन जाए और
गुनगुनाते रहे तुम्हारे लब जिन्हें हमेशा
और जो कुछ नाम न भी दोगे तो कोई शिकायत नही
मुझे पता है ये
नाम उन्हें दिए जाते है जिन्हें किसी एक शब्द में तराशा जा सके
मैंने तो हर पल में बदला है अपना मिजाज़ तुम्हारे लिए